गुस्से में पिंपलगांव–किटाड़ी के 188 किसान
अदालत में मिली ऐतिहासिक जीत
अनमोल मेश्राम * भंडारा दस्तक न्यूज
भंडारा. लाखनी तहसील के पिंपलगांव, किटाड़ी और आसपास के किसानों ने 2013 में भेल प्रोजेक्ट के लिए दी गई 476 एकड़ उपजाऊ जमीन का मुद्दा एक बार फिर गरमाया है.
12 साल बीत जाने के बाद भी एक भी उद्योग न खड़ा होने से किसानों में तीव्र नाराजगी है. इसी पृष्ठभूमि में विजयकुमार नवखरे और विधायक डा. परिणय फुके ने संयुक्त पत्रकार परिषद लेकर प्रशासन और भेल कंपनी के खिलाफ तीखा विरोध जताया.
476 एकड़ जमीन दी, 188 किसान हुए उजाड़
प्रकल्पग्रस्त किसान संगठन के अध्यक्ष विजयकुमार नवखरे ने बताया कि राष्ट्रीय महामार्ग के पास की 476 एकड़ बहुमूल्य जमीन विकास, उद्योग और रोजगार की उम्मीद से दी थी.
हमें भरोसा था कि भेल उद्योग लगाएगी और गांव का विकास होगा. लेकिन 12 साल में एक ईंट भी नहीं लगी. यह किसानों के साथ खुला अन्याय है.
लिखित आश्वासन देकर भी उद्योग नहीं यह साफ विश्वासघात
परिणय फुके ने कहा कि MIDC और भेल कंपनी ने हर परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने का लिखित आश्वासन दिया था. तीन साल के भीतर उद्योग लगाने की शर्त थी.
लेकिन कंपनी ने धोखा दिया. उल्टा कहा कि मराठवाड़े में जमीन दें तो उद्योग लगाएंगे यह किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.
अपनी जमीन पर की बुआई, कंपनी कोर्ट पहुंची, फैसला किसानों के पक्ष में
जून 2025 में किसानों ने अपनी जमीन पर धान की बुआई कर विरोध दर्ज कराया. भेल कंपनी ने कोर्ट में स्टे लिया, पुलिस नोटिस भी जारी हुई. लेकिन लगातार सुनवाइयों के बाद न्यायालय ने किसानों का पक्ष मानते हुए कंपनी की याचिका खारिज कर दी.
अदालत का स्पष्ट आदेश
जब तक उद्योग नहीं लगता, तब तक किसान अपनी जमीन पर खेती कर सकते है.
किसानों की कानूनी जीत ऐतिहासिक नवखरे
नवखरे बोले गरीब किसानों के न्याय के लिए अदालत ने ऐतिहासिक फैसला दिया. हमें न्याय मिला है, पर संघर्ष अभी जारी रहेगा. 12 साल में उद्योग न लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है.
किसानों का सीधा सवाल
जमीन दी, रोजगार नहीं दिया अब हमारा भविष्य कौन तय करेगा?
भेल प्रकल्प का यह मुद्दा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. प्रकल्पग्रस्त किसानों का गुस्सा आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है.
अनमोल गोविंदाजी मेश्राम
मुख्य संपादक
“भंडारा दस्तक न्यूज”
मो. 9890760124
ईमेल आयडी bhandaradastak@gmail.com





