जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला जनसेवक
ईमानदारी, जवाबदेही और जनहित के प्रति समर्पण
अनमोल मेश्राम * भंडारा दस्तक न्यूज
भंडारा. नगर परिषद चुनावों का माहौल तेज होते ही नागरिकों के मन में एक सवाल गूंजने लगा है “हमारा नगराध्यक्ष और नगरसेवक कैसा होना चाहिए?”
लोकतंत्र की जड़ें तभी मजबूत होती है जब जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन सोच-समझकर करें. ऐसे में अब यह चर्चा आम हो गई है कि नगर के विकास और नागरिकों की सुविधा के लिए किस प्रकार का नेतृत्व आवश्यक है.
जननायक चाहिए
नगराध्यक्ष और नगरसेवक केवल पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक है. उन्हें जनता की भावनाओं को समझते हुए हर वर्ग के साथ समान व्यवहार करना चाहिए. सच्चा जनप्रतिनिधि वही है जो जनता के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुने और समाधान के लिए तत्पर रहे.
जनता को केवल चुनावी वादे नहीं, बल्कि कार्य में पारदर्शिता और जनहित के लिए समर्पण चाहिए.
ईमानदारी और स्वच्छ छवि आवश्यक
नगर का विकास तभी संभव है जब नेतृत्व ईमानदार और भ्रष्टाचार-मुक्त हो. नगराध्यक्ष व नगरसेवक की छवि निष्पक्ष और स्वच्छ होनी चाहिए. व्यक्तिगत लाभ या राजनीति से ऊपर उठकर उन्हें नगर के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए.
जनहित में निर्णय, निजी स्वार्थ से परे
एक जिम्मेदार नगरसेवक वह होता है जो नगर के जल, स्वच्छता, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ठोस कदम उठाए.
विकास योजनाओं का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना उसकी प्रमुख जिम्मेदारी है.
नगराध्यक्ष को निर्णय लेते समय किसी एक वर्ग या समूह के बजाय पूरे नगर के हित को ध्यान में रखना चाहिए.
संपर्क में रहना और संवाद बनाए रखना जरूरी
जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उसे आम नागरिकों के बीच जाकर संवाद करना, उनकी समस्याओं को सुनना और समाधान के लिए कार्य करना चाहिए. एक अच्छा नगरसेवक वही है जो जनता के लिए सुलभ हो, न कि केवल चुनाव के समय दिखे.
युवा और अनुभवी नेतृत्व का समन्वय
आज के बदलते समय में नगर परिषद को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो आधुनिक सोच के साथ परंपरागत अनुभव का भी समन्वय करे.
युवा नगरसेवक ऊर्जा और नवाचार लाते है, जबकि अनुभवी नेता नीति और दिशा प्रदान करते है. दोनों के सहयोग से ही नगर का सर्वांगीण विकास संभव है.
जनता को अपने मताधिकार का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए
नगराध्यक्ष और नगरसेवक का चयन केवल दल या जाति के आधार पर नहीं, बल्कि ईमानदारी, कार्यक्षमता और जनसेवा के भाव पर होना चाहिए.
सच्चे अर्थों में वही जनप्रतिनिधि सफल है जो “राजनीति नहीं, सेवा” को अपना धर्म माने.
अनमोल गोविंदाजी मेश्राम
मुख्य संपादक
“भंडारा दस्तक न्यूज”
मो. 9890760124
ईमेल आयडी bhandaradastak@gmail.com






